स्कूल गर्लफ्रेंड की गांड़ की चुदाई Hindi sex stories

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Girlfriend ki gaand chudai

GF  सेक्स स्टोरी में मेरे दोस्त ने अपनी गर्लफ्रेंड की मदद से मेरी एक GF बनवाई. मैंने उसे सेक्स के लिए मनाया. एक रेस्तरां के केबिन में सेक्स के लिए मिलते थे. मैं उसे वहां ले गया.

सेक्स स्टोरी की दुनिया में आपका स्वागत है।

मैं दीपू अजमेर से हाजिर हूँ अपनी हाल ही की एक सेक्स कहानी को लेकर।

मेरी उम्र 29 वर्ष है और मेरी लंबाई 6 फीट 4 इंचहै।

मैं दिखने में सांवला हूँ।

मैं हरियाणा में नौकरी करता हूँ।

यह GF  सेक्स स्टोरी एक साल पहले की है।

मेरे एक दोस्त राजेश ने अपनी गर्लफ्रेंड डिम्पी से बातों–बातों में मेरे लिए अपनी एक सहेली को सेट करवाने को बोला।

मेरा दोस्त राजेश अजमेर में ही अपनी दुकान चलाता था।

उसकी गर्लफ्रेंड स्कूल में पढ़ती थी जो कि बारहवीं कक्षा की छात्रा थी।

राजेश की जीएफ ने मेरा नंबर अपनी सहेली को दिया जिसका नाम स्वीटी था। उसने मुझसे संपर्क किया।

सबसे पहले उसने अपना नाम ‘स्वीटी’ बताया और बोली– मुझे यह नंबर मेरी दोस्त यानि राजेश की जीएफ ने दिया है।

धीरे–धीरे हम आपस में खूब चैट करने लगे।

कुछ दिन बाद बात किस तक पहुँच गई।

मुझे लगने लग गया था कि यह लड़की  कुछ ज्यादा ही रूचि ले रही है मुझमें!

स्वीटी के बारे में मैं आप सबको बता देता हूँ।

वह दिखने में सांवले रंग की पतली लड़की है।

उसकी लंबाई 5 फीट और उम्र 22 वर्ष है।

पहली बार जब मेने उसे देखा स्कूली ड्रेस, सलवार कुर्ते में … तो वह मुझे कुछ खास नहीं लगी।

लेकिन वह फोन पर बातें करने की बहुत शौकीन थी।

कुछ दिनों के बाद मैं 4 दिन की छुट्टी लेकर गाँव चला गया।

स्कूल की छुट्टी के बाद हमने मिलने की प्लानिंग की।

क्युकी वह फोन स्कूल नहीं ले जाती थी तो टाइम और जगह हमने पहले ही डिसाइड कर लिया था।

हमने दोपहर को 2:15 पर स्कूल के पास एक कैफे में मिलना तय किया।

अगले दिन योजना अनुसार मैं और राजेश दोनों स्कूल पहुँच गए और उनका इंतज़ार करने लग गए।

कुछ देर बाद वह अपनी दोस्तो के साथ आई.

उसके साथ डिम्पी और माला थी।

हम आगे–आगे चलने लगे और वह हमारे पीछे–पीछे अपने कुछ ही देर में हम कैफे पहुँच गए।

कैफे पहुँच कर हम दोनो अपने–अपने केबिन में चले गए।

सुरेन्द्र हेमा को लेकर एक केबिन में चला गया।

माला ने अपने बीएफ को कॉल किया, वह भी आ गया।

मैं और नेहा एक केबिन में चले गए।

हम दोनो पहली बार ऐसे मिल रहे थे तो वह कुछ ज्यादा ही शरमा रही थी।

मैं भी पहली बार कैफे में लड़की के साथ रोमांस करने के लिए गया था तो मुझे भी थोड़ा डर लग रहा था।

इसीलिए मेरा गला भी सूख रहा था तो मैं काउंटर से पानी की बोतल लेकर आया।

मैंने थोड़ा पानी पिया और उसको भी पानी पीने को कहा परंतु उसने मना कर दिया।

धीरे–धीरे मैं उससे बाते करना शुरू की और उससे उसकी रजामंदी मांगी तो उसने सेक्स के लिए साफ इंकार कर दिया लेकिन किस के लिए मान गई।

मैंने अपने होंठ उसके मुलायम होंटो पर रख दिए और लिप लॉक करके चूमने लगा।

फिर धीरे से मैंने अपन एक हाथ उसके सर के ऊपर रखा और बालों से खेलने लगा।

फ़िर अपना हाथ फेरते–फेरते उसकी कमर को पकड़ा।

उसकी कमर इतनी पतली थी कि मेने एक हाथ से ही पूरी पकड़ ली।

कुछ देर में वह थोड़ी थोड़ी गर्म होने लगी और मैं उसके छोटे–छोटे मम्मो को दबाने लगा।

उसके मम्मों का आकार बहुत छोटा था और निप्पल भी छोटे छोटे थे।

शायद मुझसे पहले कभी उसके मम्मे किसी लड़के ने नहीं दबाए थे, इसी वजह से उसके चूचों में उभार अभी तक नहीं आया था।

मेरे अनुमान से उसकी ब्रा का आकार भी अभी 26″ का ही होगा।

उसको किस करते हुए मैं एक हाथ से उसके मम्मे दबाता रहा, वहीं दूसरे हाथ उसके पेट पर फेरते फेरते उसकी सलवार में डाल दिया।

जब मैंने दूसरे हाथ को उसके सलवार से पैंटी में अंदर डाला तो महसूस हुआ कि उसकी चूत का साइज भी मम्मो की तरह छोटा सा है।

उसकी चूत पर हाथ फिरते हुए मैंने अपनी एक अंगुली जब उसकी चूत में डालने की कोशिश की तो वह पागलों की तरह मचलने लगी क्योंकि उसकी चूत बहुत टाइट थी एक दम सील पैक।

मैं सलवार का नाड़ा खोलने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मना करने लगी.

लेकिन मैं अब गर्म हो गया था।

मुझे उसकी सील पैक चूत में अपना लन्ड डालना था जो मेरी पैंट में खड़ा था।

जब नेहा ने मुझे सलवार खोलने से मना कर दिया तो मुझे बहुत गुस्सा आया.

तब मैंने उससे कहा– जब तुम्हे कुछ करना ही नहीं था, तो फिर तुमने मुझे यहां बुलाया ही क्यों था? अब मेरे से बिना सेक्स किए नहीं रहा जा रहा है।

मुझे तो सेक्स करना था, पर स्वीटी नहीं मान रही थी।

मैंने स्वीटी का हाथ अपने लंड पर रखा और उसके हाथ से अपने लंड को दबाने लग गया।

फ़िर मैंने अपना लंड निकाल कर स्वीटी के हाथ में रख दिया.

लेकिन स्वीटी ने तुरंत अपना हाथ खीच लिया।

फिर मैंने अपना लंड उसकी मुंह की ओर कर दिया और कहा– चूसो इसे!

इस पर स्वीटी ने मना कर दिया जिससे मेरे दिमाग का दही हो गया, उसने काम करना बंद कर दिया।

फ़िर गुस्से में मैने अपने कपड़े ठीक किए और केबिन के बाहर कुर्सी पर बैठ गया।

थोड़ी देर बाद वह भी अपने कपड़े ठीक करके बाहर आ गई।

मेरा दोस्त सुरेन्द्र और हेमा अभी भी केबिन में लगे पड़े थे और हम केविन के बाहर उनका इंतजार कर रहे थे।

थोड़ी देर के बाद सुरेन्द्र भी बाहर आ गया और पूछने लगा कुछ हुआ या नहीं, तुम लोग इतना जल्दी कैसे आ गए?

तब मैं बोला– बस ऐसे ही आ गए।

वह समझ गया था कि इनके बीच कुछ नहीं हुआ और सब  अधूरा रह गया है।

उसने मुझसे कहा– सब कुछ एक दिन में ही नहीं मिलता है, नया माल है थोड़ा टाइम लगेगा।

फ़िर हम सब वहां से अपने अपने घर वापस लौट आए।

घर पहुंचने के बाद रात को उसका मैसेज आया और वापस हमारी बात होने लगी।

क्योंकि मैं गुजरात में नौकरी करता था तो मैं वापस गुजरात लौट आया।

कुछ दिन बाद हमारी वीडियो कॉल पर बात होने लगी.

तब मैंने उससे न्यूड वीडियो कॉल करने के लिए बोला। पर उसने मना कर दिया।

फिर धीरे–धीरे वह अपने मम्मे वीडियो कॉल पर दिखाने लगी और सेक्स के लिए भी हा करने लगी।

जब भी हम फ्री होते तो कॉल पर बात करते।

वह जब भी मिलने को बोलती तो मैं कह देता ‘मुझे तेरे साथ सेक्स करना है।’

इस पर वह चूत देने से मना कर देती।

कभी–कभी मैं मजाक–मजाक में उससे कह देता ‘आगे नहीं तो पीछे ही डलवा लेना!’

तो वह कुछ मान जाती थी तो मैं भी थोड़ा खुश हो जाता कि ‘आगे नहीं तो पीछे ही सही। हस्तमैथुन करने से तो लाख गुना अच्छा है इसकी छोटी सी गांड मार लेना. और गांड़ में डालने के चक्कर में सीधा उसकी चूत में ही डाल दूंगा अपना लंड, एक बार मान तो जाए।’

वह भी इस बात से मान गई कि चूत सील पैक रहेगी तो सुहागरात के काम आयेगी।

कुछ दिन ऐसे ही बीत गए।

एक दिन गाँव जाने का समय मिला तो मैं समय और लोकेशन के हिसाब से उससे मिलने पहुंचा।

मैंने कॉण्डम पहले ही खरीद लिया था।

कैफे की उस केबिन में हम फिर से मिले।

घर के कुछ काम में व्यस्त होने के कारण मैं उस दिन थोड़ा देर से पहुंचा था तो मेरा दोस्त, सुरेन्द्र ही स्वीटी को कैफे लेकर आया और और साथ में केबिन में बैठा था।

सुरेन्द्र ने जीजा साली वाला मजाक करके उसको गुस्सा कर दिया था।

सुरेन्द्र ने मेरे पहुंचते ही मुझे बोल दिया– थोड़ी सी जीजा साली वाली छेड़छाड़ कर दी है मैंने!

मैं बोला– मैं सब संभाल लूंगा, तू टेंशन मत ले।

वह मेरे लेट आने की बात पर मुझसे नाराज दिख रही थी।

मैंने उससे कहा– सुरेन्द्र ने छेड़ा क्या?

इस पर उसने कोई जवाब नहीं दिया।

मैंने उसे बताया कि घर के कुछ काम की वजह से मैं लेट हो गया था।

फ़िर मैं उसके लिए कोल्डड्रिंक लाया।

पहले उसको पिलाया फिर मैंने भी पिया।

वह गर्मी के कारण पसीने में भीग गई थी।

मैंने नेहा को चूमना शुरू कर दिया।

फिर मैं उसकी चूची को दबाने लग गया।

कुछ देर बाद मैने उसकी माम्मो को उसके सूट से आजाद किया उसके निप्पल चूसने लगा।

जिससे वह गर्म होने लगी।

धीरे–धीरे मैं अपने एक हाथ से उसके पेट को सहलाने लगा फिर उसकी कमर को पकड़ा जिससे वह मचल उठी।

मैंने उसकी कमर पर पकड़ ढीली की तो उसकी सलवार का नाड़ा मेने अपने हाथ ले लिया।

स्वीटी ने दोनों हाथों से अपनी सलवार का नाड़ा कसकर पकड़ लिया और मुझसे मना करने लगी।

लेकिन मैंने थोड़ी जिद करके उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया।

फिर उसकी सलवार को थोड़ा नीचे किया उसकी सील पैक चूत को दबाने लगा।

जिसको मैंने अभी तक देखा भी नहीं था।

कैफे की केबिन भी नेहा की चूत की तरह छोटी ही थी।

जिसमें बस दो कुर्सी थी और सामने एक छोटी सी डेस्क लगभग आधा फीट का लकड़ी का पट्टा था।

मेरी हाईट और स्वीटी की हाईट मैच नहीं हो पा रही थी इसलिए उस केबिन में कोई पोजीशन नहीं बन पा रही थी।

मैंने नेहा को बोला– मेरा लंड पकड़ो!

वो मेरा लंड पकड़ हिलाने लगी।

उसका हाथ लगते ही मेरा लंड फुफकारते हुए खड़ा हो गया।

थोड़ी देर बाद मैंने स्वीटी से कहा– तैयार हो जाओ लन्ड  लेने के लिए?

वह फ़िर से मना करते हुए बोली– आगे से नहीं करना!

तो मैं बोला– ठीक है आगे से नहीं करूंगा पीछे से कर लेंगे!

मुझे तो बस चूत ही मारनी थी, फिर मैंने सोचा पीछे से करने के चक्कर में इसकी चूत में लुंड दल दूंगा!

मैंने अपना पैंट नीचे सरकाया, स्वीटी को खड़ा किया और लंड पर कॉण्डम चडाने लगा।

जिससे नेहा को लगे कि मैं उसकी चूत नहीं बल्कि गांड ही मरूंगा।

मुझे तो पता था कि इसकी चूत मारो या गांड यह चिल्लाएगी तो पक्का!

तो मैं उसे किस करने लगा.

वह गर्म होने लगी तो मैं बोला– टेबल पर हाथ रखो और झुक जाओ!

क्योंकि उसका पहली बार था तो वह लौड़े पर भी नहीं बैठ सकती थी और मुझे भी गांड के बहाने चूत मारनी थी।

स्वीटी झुक गई लेकिन लंबाई मैच न होने के कारण कुछ भी ठीक तरीके से नहीं हो पा रहा था।

फिर मैंने उसे थोड़ा और झुकने को कहा और लंड को उसके कूल्हों के बीच फसाया फिर थोड़ा ज़ोर लगाते ही लंड चूत के ऊपर से फिसल गया।

फ़िर मैंने दुबारा लन्ड सेट किया तो लंड थोड़ा सा चूत में फंस गया.

उसके मुंह से चीख निकलने वाली थी कि उससे पहले ही मैंने उसके मुंह को अपने हाथ से दबा लिया जिससे वह चीख नही पाई।

और अपने एक हाथ से मैं उसके मम्मे दबाने लगा।

जब वह थोड़ा शांत हुई तो फ़िर मैने एक जोरदार झटका मारा, पर इस बार लंड आधा ही गया।

एक ही झटके में लंड चूत में फंसना मुझे थोड़ा अजीब लगा परंतु यह कन्फर्म करना मुझे उचित नहीं लगा कि लंड उसकी चूत में गया है या गांड में!

आधा लंड फंसने के बाद दूसरे झटके में पूरा लंड मैने उसकी चूत में पेल दिया।

इस बार नेहा की आंखों से आँसू निकल आए और वह रोने लगी और मुझसे लंड बाहर निकालने के लिए विनती करने लगी।

कुछ देर तक इसी पोजीशन में शांत खड़े रहने के बाद जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैं धीरे–धीरे लन्ड अंदर बाहर करने लगा।

जगह की कमी की वजह से और लंड का दबाव भी ज्यादा होने की वजह से मजबूत कॉण्डम भी फट गया।

थोड़ी देर बाद उसको भी खूब मजा आने लगा तो मैं भी तेजी से धक्के लगाने लगा और 5 मिनट में ही मैं अपने चरम पर पहुंचने को हुआ।

फिर मैंने उसी पोजीशन में उसकी चूत में झड़ गया।

जब मैंने अपना लंड बाहर खींचा तो देखा कि कॉण्डम फट गया है तो में टेंशन में आ गया।

फिर हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए और एक–दूसरे को किस करने के बाद मैंने सुरेन्द्र को मेडिकल से अनवांटेड 72 लाने का कहा।

कुछ देर बाद सुरेन्द्र दबा लेकर आ गया जिसके साथ मैंने दर्द की टैबलेट भी मंगवाई थी।

मैंने स्वीटी से कहा– कॉण्डम फट चुका है, पानी अंदर गिर गया है! इसलिए अनवांटेड 72 खा लो!

लेकिन उसने मना कर दिया और बोली– ऐसी कोई बात नहीं!

लेकिन मैने उस पर दबाव डाला क्योंकि मैं कोई जोखिम नहीं लेना चाहता था।

मेरे ज्यादा जोर देने पर उसने अनवांटेड 72 टैबलेट खा ली।

मैं आज उसको पहली बार चोदने से खुश था और उसको अपनी बाइक से उसके घर के पास ड्रॉप किया फिर घर आ गया।

रात को उसने मैसेज किया- पीछे बहुत दर्द हो रहा है, बैठा तक नहीं जा रहा है! शौच करने गई थी तब भी बहुत दर्द हो रहा था और जो पानी अंदर गया था वह शौच के बाद बाहर निकल आया!

तब मैं बोला– मैंने तो चूत मारी थी?

तो स्वीटी बोली– नही अपने गांड मारी थी!

मुझे खुद पर भरोसा नहीं हो रहा था कि मैं लड़की की चूत और गांड में अंतर नहीं पता कर पाया।

स्वीटी की गांड मारना मेरे लिए आश्चर्य से भरा हुआ था क्योंकि मैंने तो गांड को चूत समझ लिया था।

घर पर मैंने अपने लंड को चेक किया पर उसकी गांड की ज़रा सी भी गंद मेरे लन्ड पर नहीं लग रही था।

लंड एकदम क्लीन था।

मैंने इसलिए चेक किया क्योंकि पहले भी मैंने अपनी एक गर्लफ्रेंड की गांड ली थी तो मेरे लंड पर उसकी गांड का कचरा चिपक गया था।

उस कचरे को साफ करने में मुझे बहुत मेहनत लगी थी!

इस गांड की चुदाई के लगभग 5 दिन बाद मुझे अपनी नौकरी पर जान था तो मैंने उससे फिर से मिलने को बोला क्योंकि मैं उसकी चूत मरना चाहता था।

गुजरात लौटने से एक दिन पहले शाम को हम फिर एक कैफे में मिले।

इस बार फ़िर से हम उसी पतली सी केबिन में मिले जिसमें बस एक ही पोजिशन बन सकती थी।

स्वीटी ने आज आते ही कहा– मेरे पीरियड आ गए है, इसीलिए मैं सेक्स नहीं कर सकती। केवल उपर उपर से ही करगे।

लेकिन मैं ठहरा ठरकी … मैं बोला– कोई बात नहीं फिर से गांड़ में ही डाल लेंगे!

स्वीटी को जल्दी ही गर्म किया और अपने खड़े लन्ड पर कॉण्डम चढ़ा कर स्वीटी को खड़े–खड़े नहीं चोदकर उसको आज अपने लंड पर बैठाया।

 वह भी लन्ड गांड में लेकर बैठ गई।

आज पिछली बार के मुकाबले उसे दर्द बहुत कम हुआ।

फिर मैंने कहा– लंड चूत में गया है क्या?

तो उसने कहा– नहीं गांड में गया है?

फिर मैंने अपने एक हाथ आगे ले जाकर उसकी चूत को टटोला।

उसकी चूत में लंड न होकर उसकी गांड में घुसा था तो मुझे बहुत पछतावा हुआ कि आज फ़िर मैं उसकी चूत नहीं मार पाया।

मैंने अपनी एक अंगुली स्वीटी की चूत में डाली तो उसकी चूत में एक अंगुली तक जाने की जगह नहीं थी।

उसकी चूत बिलकुल सील पैक थी।

पीरियड के कारण मेरी अंगुली पर खून आ गया जो बदबू मार रहा था।

चूत के भरोसे लन्ड गांड में घुसने के हुए इस धोखे की वजह से पांच से सात मिनट बाद मेरा लंड उसकी गांड़ की गर्मी सहन नहीं कर पाया और मैं स्वीटी की गांड़ चोदते हुए मैं झड़ गया।

हमने अपने कपड़े ठीक किए और अपने–अपने घर वापस आ गए।

अगले दिन मैं गुजरात के लिए निकल गया।

मैसेज में बात होने पर उसने बताया कि ‘उसने जान करके अपने आप को सील पैक रखा है’। दोनों बार में उसने अपनी  चूत को हाथ से कवर कर लिया था जिससे लंड उसकी चूत में न घुसे और ज्यादा दबाव देते ही लंड गांड में घुस जाए।

अब वह मेरा उपहास कर रही थी।

तब मैंने कहा– जल्दी ही मैं वापस जयपुर आऊंगा और तेरी चूत का चोद चोद कर भोसड़ा बना दूंगा!

नौकरी से छुट्टी न मिल पाने के कारण मुझे दो महीने होने चुके थे मैं घर नही जा पाया।

लेकिन स्वीटी चुदने के लिए मुझे रोज आने के लिए कहती थी.

उसे लंड लेने की गरमी चढ़ी हुई थी.

तब सुरेन्द्र मुझसे बोला– तू तो आ नहीं पाएगा तो मैं ही इसकी सील तोड़ देता हूं? तेरे लिए माल तैयार कर देता हूं, सीधा आकर चूत मारना!

मैं सोच में डूब गया तब सुरेन्द्र बोला– तू नहीं चोदेगा तो यह किसी और से करवाएगी. इससे अच्छा है कि मैं ही इसकी सील पैक चूत चोद दूं।

कुछ दिनों के बाद सुरेन्द्र ने उसको चोद दिया और उसकी  सील तोड़ दी।

मैं अपने दोस्त पर बहुत गुस्सा आया था!

आपको मेरी और मेरी गर्लफ्रेंड स्वीटी की यह GF बैक सेक्स स्टोरी कैसी लगी जरूर बताएं?

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